Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अथोत्तस्थुर्निकुञ्जेभ्यः कन्दरेभ्यः सुराचलात् ।
प्रलयान्त इवाक्षुब्धा भीमाः स्वर्वासिनां गणाः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद मेरूपर्वत के निकुजो से ओर कन्दराओं से प्रलयकाल
की तरह क्षुब्ध ओर भयंकर देवताओं के गण युद्ध के लिए उतर आये