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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

देवासुरपताकिन्योस्तद्युद्धमभवत्तयोः । अकालोल्वणकल्पान्तभीषणं भुवनान्तरे ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उन देव ओर असुर सेनाओं का वन के मध्य में वह युद्ध अकाल में हुए दुःसह प्रलय के समान भीषण हुआ