Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
पेतुः प्रलयपर्यस्तचन्द्रार्का इव दीप्तयः ।
शिरांसि कुन्डलोहयोततेजःपीततमांस्यथ ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद कुण्डलो
की कान्तियों के तेज से अन्धकार का नाश कर चुके मस्तक, प्रलयकाल में नष्ट हो गये हैं आश्रयभूत
चन्द्रमा और सूर्य जिनके ऐसी दीप्तियों की तरह, धड़ों से गिरने लगे