Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
जुघूर्णुर्भटनिर्मुक्तसिंहनादविराविताः ।
प्रलयानिलसंपूरैः स्फुटहासा इवाद्रयः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रलयकाल के वायुओं के
महाप्रवाहों से पड़ी हुई दराररूपी हँसी से युक्त तथा दुर्दान्त योद्धाओं से छोड गये सिंहनादो से मुखरित
पर्वत कोपने लगे