Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
देवास्ते च समाजग्मुरश्वमेधैधिता इव ।
असुरानस्त्रविभ्रष्टाञ्जलदानिव वायवः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
अश्वमेघ यज्ञों से वृद्धि को प्राप्त हुए से देवता लोग भी अस्त्रौ से रहित हुए असुरों के पास ऐसे आये
जैसे मेघों के समीप वायु आते हैं