Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
रथसंपातसंपिष्टशस्त्रशैलरटन्नटः ।
त्रुटद्धृदयनिःसत्त्वकर्कशाक्रन्दघर्घरः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
रथ के ऊपर पड़ने से पीसे गये शस्त्रों
से पर्वतों में शब्द करता हुआ वह कोलाहल नाचनेवाले नट के समान ताल और लय के अनुसार था,
जिनके हृदय मारे भय के फट रहे थे, ऐसे बलहीन पुरुषों के करुण क्रन्दन से उसमें घरघराहट हो रही
थी