Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
पिण्डग्रहेण नभसि भूभागमिव कुट्टिमम् ।
मुष्टिग्राह्यो महामेघमन्थरोदरपीवरः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
वह कहीं पर आकाश
में अत्यन्त घन होने के कारण मानों गज बनाता हुआ सा, कहीं पर मुट्ठी में पकड़ने योग्य सा और कहीं
पर जलभार से भरे हुए मेघों के उदर के समान गम्भीर था