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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

अथोदपतदुत्तालैर्लोकपालेभमण्डलैः । कल्पाभ्रस्फूर्जिताकारो दारुणः समरारवः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

दिग्गज आदि द्वारा कुचले जा रहे लोगों के रण कोलाहल का वर्णन करते हैं। इसके अनन्तर ऊँचे तालों के समान विशालकाय लोकपालों के दिग्गजों से प्रलयकालमें मेघों से वृद्धि को प्राप्त हुए कोलाहल के आकार का बड़ा भीषण रण कोलाहल हुआ