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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

मन्दरोद्धतदुग्धाब्धिसंक्षोभसदृशाङ्गकः । रतिश्रुद्धुंघुमास्फोटघटितद्वीपजन्तुभूः ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

मन्दराचल से अमृतमन्थन के समय अमृतोत्पत्ति होने पर अमृत के प्रति आसक्ति होने के कारण अमृतोत्पत्ति को सुन रहे देवता ओर असुरो का हर्षोत्कर्ष होने पर घंघम्‌ शब्द के सदृश ताल ठोकना आदि के शब्दों से उसने साता द्वीप रूपी प्राणी निवासभूमि को व्याप्त कर रक्खा था