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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 26, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

चेरुः परस्पराघातहतहेतिसमुत्थिताः । लोलानलकणाःकल्पविशीर्णा इव तारकाः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

परस्पर के प्रहारो से नष्ट हुए शस्त्रास्त्रों से निकली हुई चंचल आग की चिनगारियाँ प्रलयकाल में आकाश से टूटे हुए तारों की तरह उड़ने लगी