Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तेषामाविरभूद्ब्रह्मा रक्तरक्ताननश्रियाम् ।
सायं रक्तीकृताम्बूनामब्धीनामिव चन्द्रमाः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
देवताओं के, जिनकी मुखशोभा रुधिर से
लाल हुई थी, सन्मुख जैसे सन्ध्या के समय लाल बादलों से लाल जलवाले सागरों के सन्मुख चन्द्रमा
प्रादुर्भूत होता है वैसे ही ब्रह्माजी आविर्भूत हुए