Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
प्रणम्य ते सुरास्तस्मा अनर्थं शम्बरेहितम् ।
सम्यक्प्रकथयामासुर्दामव्यालकटक्रमम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उन देवताओं ने ब्रह्माजी को प्रणाम करके दाम,
व्याल और कट की सृष्टिरूप शम्बरासुर का अनर्थकारी कार्य भलीभाँति उनसे कहा