Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
वासनातन्तुबद्धा ये आशापाशवशीकृताः ।
वश्यतां यान्ति ते लोके रज्जुबद्धाः खगा इव ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जो लोग वासनातंतु से बँघे हैं और आशारूपी पाश के वशीभूत
हैं, वे रज्जु में बँधे हुए पक्षियों की तरह लोक में औरों की पराधीनता को प्राप्त होते हैं