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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

ये भिन्नवासना धीराः सर्वत्रासक्तबुद्धयः । न हृष्यन्ति न कुप्यन्ति दुर्जयास्ते महाधियः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिन धीर पुरुषों की वासनाएँ नष्ट हो गई हैं और जिनकी बुद्धि सभी जगह आसक्त नहीं है, वे न तो कहीं हर्ष को प्राप्त होते हैं और न कहीं पर शोक को प्राप्त होते हैं, उन महाबुद्धियों पर विजय पाना कठिन है