Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
यस्यान्तर्वासनारज्ज्वा ग्रन्थिबन्धः शरीरिणः ।
महानपि बहुज्ञोऽपि स बालेनापि जीयते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस पुरुष के भीतर वासनारूपी रज्जु की गाँठ बँधी है, वह महान क्यों न हो, बहुज्ञ ही क्यों न हो, उसे
बालक भी जीत लेते हैं