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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

अयं सोऽहं ममेदं तदित्याकल्पितकल्पनः । आपदां पात्रतामेति पयसामिव सागरः ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

यह देहादि ही मैं हूँ, यह जय-पराजय, पूजा, जीवन आदि मेरा है इस प्रकार की कल्पनाओं से युक्त पुरुष जैसे सागर जलों का आश्रय होता है, वैसे ही आपत्तियों का आश्रय बनता है