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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 23

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

अनन्तस्याप्रमेयस्य येनेयत्ता प्रकल्पिता । आत्मनस्तस्य तेनात्मा स्वात्मनैवावशीकृतः ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसने अनन्त, अप्रमेय उस आत्मा की सीमा की कल्पना की, उसने अपने आत्मा से ही अपने आत्मा को विवश कर दिया यानी संसाररूपी अनर्थ से विह्वल कर दिया