Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
आत्मनो व्यतिरिक्तं यत्किंचिदस्ति जगत्त्रये ।
यत्रोपादेयभावेन बद्धा भवतु वासना ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि तीनों जगतो मे आत्मा से अतिरिक्त कोई वस्तु हो, तो उसमे ग्राह्मरूप से ग्रहण करने
के लिए वासना होगी, पर वैसा तो कुछ है ही नहीं, यह भाव है