Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
विद्यते वासना यत्र तत्र सा याति पीनताम् ।
गुणो गुणिनि हि द्वित्वं सतो दृष्टं हि नासतः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जहाँ पर वासना रहती है वहीं पर वह पीनता (स्थूलता)
को प्राप्त होती है, क्योकि धर्मी के रहने पर पीनत्व नामक गुण होता है ओर उपचय के बिना पीनता की
सिद्धि नहीं होती ओर उपचय भी दूसरे अवयव की सिद्धि होने पर होता हे । द्वितीयता भी सत् ही पदार्थ
की होती है, असत् की नहीं