Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
अन्तर्वासनया जन्तुर्दीनतामनुयातया ।
जितो भवत्यन्यथा तु मशकोऽप्यमराचलः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
देहादि के विनाश द्वारा अपने नाश की संभावना से दीनता
को प्राप्त हुई, भीतर स्थित देहादि में अहंभाव ग्रहण करनेवाली वासना से जन्तु जीता जा सकता है,
अन्यथा तो मच्छर भी अमर ओर अचल हे