Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
या या जनस्य विपदो भावाभावदशाश्च याः ।
तृष्णाकरञ्जवल्ल्यास्ता मञ्जर्यः कटुकोमलाः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
मनुष्य की जो-जो विपत्तियाँ हैं और जो भाव ओर अभाव दशाएँ हैं, वे सब तृष्णारूपी करंज लता
के कड़वे और कोमल बौर हैं