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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

वासनातन्तुबद्धो यो लोको विपरिवर्तते । सा प्रवृद्धातिदुःखाय सुखायोच्छेदमागता ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

वासनारूपी रस्सी से वेधा हुआ जो पुरुष आवागमन करता है, उस पुरुष की वृद्धि को प्राप्त हुई वह वासना अतिदुःखदायी होती है और नाश को प्राप्त हुई वह सुख के लिए होती है