Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
शैलोपमायुधविघट्टितभूधराणि रक्ताम्बुपूरपरिपूर्णमहार्णवानि ।
दैवासुरेन्द्रशवशैलविरूढकुन्ततालीवनानि ककुभां वदनानि चासन् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
उस युद्ध में दिशाओं के मुख शेलसदृश हथियारों से तहस-नहस किये गये पर्वतो से पूर्ण,
रक्तरूपी जल के प्रवाह से भरे हुए महासागरों से युक्त एवं देव ओर असुरो मे श्रेष्ठ लोगों के शवरूपी
पर्वतो पर गड़े हुए भाले रूपी ताड़-वनवाले हुए