Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
उद्गीर्णकुन्तशरशक्तिगदासिचक्रहेलानिगीर्णसुरदानवमुक्तशैला ।
काषोल्लसत्क्रकचदन्तनखाग्रमाला जीवान्विता ह्यपतदायससिंहसृष्टिः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
लोहमय आयुधरूपी सिहों की सृष्टि गिरी
जिसमें चलाये हुए भाले, बाण, शक्ति, गदा, तलवार ओर चक्रों द्वारा सुर ओर दानवं से छोड़े गये
पर्वत अनायास निगले गये थे, कटने के कारण चमक रहे आरो के दाँत ही जिनकी नखपंक्तियाँ थी,
दूसरे के जीव के हरण करने के कारण जो जीवयुक्त थी