Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
उज्ज्वाललोचनविषज्वलनातपौघदिग्दाहदर्शितयुगान्तदिनेशसेना ।
उड्डीयमानपरिदीर्घमहामहीध्रमग्नाब्धिवद्विषधरावलिरुल्ललास ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्वालाएँ उगल रही नेत्रो की विषाग्नियों
के सन्ताप समूह से उत्पन्न दिशाओं के दाह से युगान्त मेँ एक साथ उदित हुए बारह सूर्यो की
समानता जिसने दर्शायी थी, ऐसी विषधर साँपों की पंक्ति चारों ओर उड रहे सर्वतः दीर्घ ऊँचाई में
बहुत बड़े पर्वतों से व्याप्त समुद्र के तुल्य सुशोभित हुई