Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
रटद्भटास्फोटकटिस्फुटद्भिः समीरितैर्हेतिकलासितौघैः ।
परस्पराघातहतैः पतद्भिर्जगाम शीर्णा दलशो धरित्री ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
भलीभाँति छोड़े गये, सिंहनाद कर रहे योद्धाओं के टकराने से समर में
टूट रहे तथा परस्पर के टकराने से टुकड़े टुकड़े होकर गिर रहे आयुधो से ओर क्षेपिणी आदि यन्त्रो द्वारा
फेंके गये पत्थर, पर्वत आदि से समूहों के छिन्न-भिन्न हुई पृथिवी चूर-चूर हो गयी