Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अन्योन्यमायुधशिलाचलवृक्षवर्षैर्मेरुप्रमाणकठिनाङ्गनिघर्षणैश्च ।
आसीद्रणं चटचटास्फुटदन्तरिक्षं कल्पक्षयान्तमिव भीमभरोग्रनादैः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
परस्पर
आयुध शिला, पर्वत, वृक्षों की वर्षा से तथा मेरु के समान विशाल कठिन शरीरो के परस्पर टकराने से
उत्पन्न हुए बड़े भारी भीषण उग्र नादा से जिसमे चटचट शब्द से आकाश फूट रहा था, ऐसा वह रण
प्रलय के समान हुआ