Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मत्तानिलक्षुब्धजलानलार्कदलद्वयं दीर्घसुरासुरौघम् ।
ब्रह्माण्डमाखण्डितकुड्यकोणसकालकल्पान्तकरालमासीत् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें प्रचण्ड आँधी से नीचे जल ओर अग्नि क्षुब्ध थे तथा ऊपर सूर्य
क्षुब्ध थे एसे दो कपालवाला, माया से बढ़े हुए सुर ओर असुरो के समूह से पूर्ण, जिसके प्रान्तभाग की
दीवारों के कोने खण्डित हो गये थे, ऐसा ब्रह्माण्ड अकाल में हुए प्रलय के समान भीषण हुआ