Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
दिनानि कतिचित्स्वेषु कान्तेषु स्थिरकान्तिषु ।
द्विरेफा इव पद्मेषु मन्दिरेषु विशश्रमुः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे भ्रमर सुन्दर कमलो पर
विश्राम करते हैं, वैसे ही देवताओं ने स्थिर कान्तिवाले अपने सुन्दर मन्दिरों में कुछ दिन विश्राम
लिया