Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
सुरास्त्वाकर्ण्य तद्वाक्यं जग्मुः स्वाभिमतां दिशम् ।
कमलामोदमादाय वनमालामिवानिलाः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वायु कमलों की सुगन्ध लेकर अपनी-अपनी अभिमत वनपंक्तियों को जाते हैं, वैसे ही
देवता लोग भी उनके वचन सुनकर अपनी अभिमत दिशा को गये