Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
अथ दैत्यैर्ममाव्योम्नि तैः पातालतले स्थितैः ।
कालक्षेपकरं घोरं पुनर्युद्धमवर्तत ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
दुन्दुभिघोष सुनकर दैत्यं के ऊपर आने पर अन्तरिक्ष
में पातालवासी उन दैत्यों के साथ देवताओं का दीर्घ समय वितानेवाला घोर युद्ध फिर शुरु हुआ