Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
तेषां योषान्नपानेन स्वाहंकृतिमतां रतिः ।
बभूव भावभावस्था भीषणा भवभाजिनी ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने में अहंकारवाले दाम, व्याल और कट की स्त्री, अन्न-पान से विषयों की भावना
में स्थित अतएव संसार को प्राप्त करानेवाली भीषण आसक्ति हुई