Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अथ तस्मिन्रणे भीत्या सापेक्षत्वमुपाययुः ।
मत्तेभघनसंरब्धे वने हरिणका इव ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जैसे मत्त हाथियों
से खूब कुपित हुए वन में हरिण अपने जीव के विषय में प्रयत्नशील होते हैं वैसे ही उस रण में भय के
कारण वे अपने जीवन में प्रयत्नशील हुए