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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

मरिष्यामो मरिष्याम इति चिन्ताहताशयाः । मन्दं मन्दं किल भ्रेमुः कुपितैरावणे रणे ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

वे लोग हमें मारेंगे, हमें मारेंगे, इस चिन्ता से आहत हृदय होकर कुपित ऐरावतवाले रण में धीरे-धीरे घूमने लगे