Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
शरीरैकार्थिनां तेषां भीतानां मरणादपि ।
अल्पसत्त्वतया मूर्घ्नि कृतमेव परैः पदम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
मरण से भयभीत हुए एकमात्र शरीर
को चाहनेवाले उनके सिर पर अल्प बल होने के कारण शत्रुओं ने पैर रख ही दिया