Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अथ प्रम्लानसत्त्वास्ते हन्तुमग्रगतं भटम् ।
न शेकुरिन्धने क्षीणे हविर्दग्धुमिवाग्नयः ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे लकड़ियों
के जल जाने पर अग्नि चरु को नहीं जला सकती वैसे ही क्षीण बल होने के कारण वे अपने सन्मुख आये
हुए योद्धा को मारने में समर्थ नहीं हुए