Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verses 22–23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verses 22–23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 22,23
संस्कृत श्लोक
तेषु द्रवत्सु भीतेषु सर्वतो दानवादिषु ।
दामव्यालकटाख्येषु विख्यातेषु सुरालये ॥ २२ ॥
तद्दैत्यसैन्यं न्यपतद्विद्रुतं खादितस्ततः ।
कल्पान्तपवनोद्भूतं ताराजालमिवाभितः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वर्ग में ख्याति प्राप्त किये हुए दाम-व्याल-कट नामक उन दैत्यों के भयभीत होकर
चारों ओर भागने पर भागी हुई सारी दैत्य सेना आकाश से इधर-उधर ऐसे गिरने लगी, जैसे कि
प्रलयकाल के प्रचण्ड वायु से उठाया गया तारा समूह आकाश में इधर-उधर चारों ओर गिरता
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