Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 29, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
बहुनात्र किमुक्तेन मरणाद्भीतचेतसः ।
दैत्या देवेषु वलगत्सु दुद्रुवुः समराजिरात् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
बहुत क्या कहे,
मरण से भयभीत चित्तवाले वे दाम आदि दैत्य देवताओं के आक्रमण करने पर समरभूमि को छोड़कर
भाग निकले