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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 3, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

यथा स्तम्भे पुत्रिकान्तस्तस्याः स्वाङ्गेषु पुत्रिका । तस्याश्च पुत्रिकास्त्यङ्गे तथा त्रैलोक्यपुत्रिका ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे स्तम्भ के (खम्भेके) अन्दर प्रतिमा रहती है, उस प्रतिमा के अंगों में भी प्रतिमा रहती है तथा उसके अंग में भी प्रतिमा रहती है, वैसे ही ब्रह्मस्तम्भ में अणु-अणु में त्रैलोक्यरूपी प्रतिमा है