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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 3, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । महाप्रलयसर्गादावेवमेतद्रघूद्वह । स्मृत्यात्मैव भवत्यादौ प्रथमोऽसौ प्रजापतिः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

आप कहते हैं) यह जगत स्मृतिरूप ही है, पहले-पहल सर्वप्रथम प्रजापति स्मरणरूप से ही उत्पन्न होता है