Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 3, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
तत्संकल्पात्मकजगत्स्मृत्यात्मैवमिदं ततः ।
भाति संकल्पनगरं स्थितं पूर्वं प्रजापतेः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस कारण उसका संकल्पभूत यह जगत स्मृतिरूप ही है, प्रजापति का प्राथमिक संकल्प
का नगर ही इस जगतरूप से भासित होता है