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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अथ वैवस्वतेनैते ज्वलितासूग्रभूमिषु । विहितभ्रूपरिस्पन्दमात्रेणैव निवेशिताः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

तदुपरान्त यमराज ने अपने एकमात्र भ्रकुटि चढ़ाने से ही उन्हें जलती हुई रोरवादि भीषण नरक भूमिय में पहुँचा दिया