Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अपरिज्ञातमेनं ते धर्मराजं त्रयोऽसुराः ।
न प्रणेमुर्विनाशाय सामान्यमिव किङ्करम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
छत्र, चामर आदि चिह्नों को न देखने के कारण वे यमराज को नहीं
पहचान सके, अतएव साधारण सेवक के समान उन तीनों असुरो ने अपने विनाश के लिए उन्हे प्रणाम
नहीं किया