Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
धर्मराजोऽथ तं देशं कदाचित्समुपाययौ ।
महानरककार्याणां विचारार्थं यदृच्छया ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त किसी समय यमराज अपनी इच्छा से महानरकों के कार्य का विचार
करने के लिए उस प्रदेश में आये