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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

इयं मे कामिनी कन्या ममेयं प्रभुतेति च । दुरूढस्नेहबन्धानां कालस्तेषां व्यवर्तत ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

उन कुवासनाओं को ही विस्तार से दिखलाते हैँ । यह मेरी स्त्री हे, यह मेरी कन्या है और यह मेरी प्रभुता है, इस प्रकार दुरूह स्नेह बन्धन से युक्त उनका समय बीता