Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
स्वया वासनया जातास्तयैव क्रूरया पुनः ।
बन्धकर्मकराकाराः किराता राजकिङ्कराः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर वध और बन्धनकर्म करनेवाले यम किंकरों के साथ
सहवास होने के कारण वे उसी अपनी क्रूर वासना से वध और बन्धन कर्म करनेवालों के आकार के
राजकिंकर किरात हुए