Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verses 13–14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verses 13–14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 13,14
संस्कृत श्लोक
तज्जन्माथ परित्यज्य जाताः श्वभ्रेषु वायसाः ।
तदन्ते गृध्रतां यातास्ततोऽपि शुक्लतां गताः ॥ १३ ॥
सूकरत्वं त्रिगर्तेषु मेषत्वं पर्वतेषु च ।
मगधेष्वथ कीटत्वं बभ्रुस्ते च कुबुद्धयः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
किरात जन्म का त्याग करके गर्तो में कौए हुए, कौओं के जन्म के बाद
उन्हें गीध का जन्म मिला, उसके बाद वे सुग्गे हुए, फिर त्रिगर्तं देश में वे सूकर हुए और पर्वतों में मेघ
हुए । तदनन्तर उन कुबुद्धियों ने मगध देश में कीटता धारण की