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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 30, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 30, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 30 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

जज्वाल कुपितः क्वेति कल्पान्ताग्निरिव ज्वलन् । शम्बरः शमितानीको दामव्यालकटान्प्रति ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

शम्बरासुर की सारी सेना नष्ट हो गयी थी, अतएव जल रही प्रलयकाल की अग्नि की तरह कुपित हुआ वह “कहाँ गये" यों दाम, व्याल ओर कट के प्रति जल उठा