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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अतः प्रबोधाय तव वच्मि राम महामते । दामव्यालकटन्यायो मा तेऽस्त्विति तु लीलया ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : इसलिए हे महामति श्रीरामचन्द्रजी, आपको सरलता से समझाने के लिए दाम-व्याल-कट~न्याय आपका न हो, ऐसा मैं कहता हूँ

सर्ग सन्दर्भ

तीसवाँ सर्ग समाप्त इकतीसवाँ सर्म अहंकार से अर्थहानि और अनर्थ प्राप्ति कहकर दामादि की सत्ता ओर असत्ता का निराकरण ।