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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अविवेकानुसंधानाच्चित्तमापदमीदृशीम् । अनन्तभवदुःखाय परिगृह्णाति हेलया ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

विवेक का अनुसन्धान न होने से चित्त इस प्रकार की आपत्ति को अनन्त जन्मरूपी दुःख के लिए अनायास ग्रहण करता है